The Essence of the Tantra· 22.35 / 53

The Essence of the Tantra22.35

22.35

मध्यस्थनालगुम्फितसरोजयुगघट्टनक्रमादग्नौ । मध्यस्थशशधरसुन्दरदिनकरकरौघसङ्घट्टात्

Transliteration (IAST)

madhyasthanālagumphitasarojayugaghaṭṭanakramādagnau | madhyasthaśaśadharasundaradinakarakaraughasaṅghaṭṭāt

— मध्य में स्थित नाल से गुम्फित (गूँथे हुए) ; — सरोज-युग्म के घट्टन (घर्षण) के क्रम से ; — अग्नि में ; — मध्य में स्थित शशधर (चन्द्र) ; — सुन्दर दिनकर (सूर्य) की किरण-समूह के सङ्घट्ट से

मध्य में स्थित नाल से गुम्फित (गूँथे हुए) सरोज-युग्म के घट्टन (घर्षण) के क्रम से अग्नि में, मध्य में स्थित शशधर (चन्द्र) एवं सुन्दर दिनकर (सूर्य) की किरण-समूह के सङ्घट्ट से,