The Essence of the Tantra· 22.30 / 53

The Essence of the Tantra22.30

22.30

तृप्तं देवीचक्रं सिद्धिज्ञानापवर्गदं भवति । शान्ताभ्यासे शान्तं शिवम् एति यद् अत्र देवताचक्रम्

Transliteration (IAST)

tṛptaṃ devīcakraṃ siddhijñānāpavargadaṃ bhavati | śāntābhyāse śāntaṃ śivam eti yad atra devatācakram

— तृप्त देवी-चक्र ; — सिद्धि, ज्ञान एवं अपवर्ग (मोक्ष) देने वाला ; — शान्त के अभ्यास में ; — शान्त शिव को प्राप्त होता है ; — जो यहाँ देवता-चक्र है

तृप्त देवी-चक्र सिद्धि, ज्ञान एवं अपवर्ग (मोक्ष) देने वाला होता है। शान्त के अभ्यास में जो यहाँ देवता-चक्र है, वह शान्त शिव को प्राप्त होता है।