मार्जारमूषकश्वादिभक्षणे तु शङ्का जनिता निरयाय इति ज्ञानी अपि लोकानुग्रहेच्छया न तादृक् कुर्यात् लोकं वा परित्यज्य आसीत इति स्थण्डिलयागः
Transliteration (IAST)
mārjāramūṣakaśvādibhakṣaṇe tu śaṅkā janitā nirayāya iti jñānī api lokānugrahecchayā na tādṛk kuryāt lokaṃ vā parityajya āsīta iti sthaṇḍilayāgaḥ
किन्तु मार्जार (बिल्ली), मूषक (चूहा), श्वान आदि के द्वारा भक्षण में उत्पन्न शंका निरय (नरक) के लिए (होती है) — अतः ज्ञानी भी लोक-अनुग्रह की इच्छा से वैसा न करे, अथवा लोक (जन-समुदाय) को परित्याग कर एकान्त में रहे — यह स्थण्डिल-याग है।