The Essence of the Tantra· 20.12 / 65

The Essence of the Tantra20.12

20.12

अधिशय्य पारमार्थिकः भावप्रसरं प्रकाशम् उल्लसति या

Transliteration (IAST)

adhiśayya pāramārthikaḥ bhāvaprasaraṃ prakāśam ullasati yā

— अधिशयन कर, उस पर स्थित होकर ; — पारमार्थिक — परम सत्य रूप ; — भाव-प्रसर (सत्ता/प्रपञ्च का विस्तार) ; — प्रकाश (चैतन्य का) ; — जो उल्लसित होती है (वह कान्ति)

भाव-प्रसर पर अधिशयन कर जो पारमार्थिक प्रकाश उल्लसित होता है —