The Essence of the Tantra· 13.70 / 101

The Essence of the Tantra13.70

13.70

ततो वामे सोम्यतया पूजयित्वा शुद्धतत्त्वाप्यायिनं ततः प्रणामं कुर्यात्

Transliteration (IAST)

tato vāme somyatayā pūjayitvā śuddhatattvāpyāyinaṃ tataḥ praṇāmaṃ kuryāt

— वाम (हाथ) में ; — सौम्य भाव से (शीतल/चन्द्र-स्वभाव से) ; — शुद्ध-तत्त्वों से आप्यायित करते हुए ; — प्रणाम करे

फिर वाम (हाथ) में सौम्य भाव से पूजा कर, शुद्ध-तत्त्वों से आप्यायित करते हुए, फिर प्रणाम करे।