मन्त्राभ्यासे नित्यपूजायां श्रवणे ऽध्ययने अधिकारी नैमित्तिके तु सर्वत्र गुरुम् एव अभ्यर्थयेत्
Transliteration (IAST)
mantrābhyāse nityapūjāyāṃ śravaṇe 'dhyayane adhikārī naimittike tu sarvatra gurum eva abhyarthayet
मन्त्र-अभ्यास में, नित्य-पूजा में, श्रवण में, अध्ययन में वह अधिकारी है; किन्तु नैमित्तिक (कर्म) में तो सर्वत्र गुरु से ही प्रार्थना (अभ्यर्थना) करे।