The Vision of Śiva· 7.56 / 122

The Vision of Śiva7.56

7.56
कार्यो मूलसमावेश इति ज्ञात्वा तथोदयः । सर्वामूर्तत्वतत्त्वास्थाबुद्धिदृष्टिप्रसक्तितः ॥५६॥
kāryo mūlasamāveśa iti jñātvā tathodayaḥ | sarvāmūrtatvatattvāsthābuddhidṛṣṭiprasaktitaḥ
— किया जाना चाहिए ; — मूल में समावेश ; — ऐसा जानकर ; — वैसा उदय ; — समस्त के अमूर्तत्व के तत्त्व में आस्थावान् बुद्धि और दृष्टि के प्रसक्ति के कारण

मूल में समावेश किया जाना चाहिए — ऐसा जानकर वैसा उदय (होता) है — समस्त के अमूर्तत्व के तत्त्व में आस्थावान् बुद्धि और दृष्टि के प्रसक्ति (दृढ़ संलग्नता) के कारण।