तस्माद्धिरण्यगर्भादियोगसांख्येतिहासताम् ॥१६॥
tasmāddhiraṇyagarbhādiyogasāṃkhyetihāsatām
— तो (इसी न्याय से शब्द-मत को) हिरण्यगर्भ आदि, योग, सांख्य और इतिहास (आदि शास्त्रों की समान प्रामाणिकता को भी स्वीकार करना पड़ेगा)।
— तो (इसी न्याय से शब्द-मत को) हिरण्यगर्भ आदि, योग, सांख्य और इतिहास (आदि शास्त्रों की समान प्रामाणिकता को भी स्वीकार करना पड़ेगा)।