The Vision of Śiva· 2.16 / 90

The Vision of Śiva2.16

2.16
तस्माद्धिरण्यगर्भादियोगसांख्येतिहासताम् ॥१६॥
tasmāddhiraṇyagarbhādiyogasāṃkhyetihāsatām
— इसलिए ; — हिरण्यगर्भ आदि, योग, सांख्य और इतिहास की (समान) स्थिति को

— तो (इसी न्याय से शब्द-मत को) हिरण्यगर्भ आदि, योग, सांख्य और इतिहास (आदि शास्त्रों की समान प्रामाणिकता को भी स्वीकार करना पड़ेगा)।