The Heart of Recognition · 1.3

The Heart of Recognition 1.3

1.3
तन्नाना अनुरूपग्राह्यग्राहकभेदात् ॥३॥
tan nānā anurūpa-grāhya-grāhaka-bhedāt
sūtra
— वह (विश्व) ; — नाना, विविध ; — अनुरूप, परस्पर अनुकूल ; — ग्राह्य — ज्ञेय विषय ; — ग्राहक — ज्ञाता विषयी ; — भेद के कारण

वह (विश्व) ग्राह्य (विषय) और ग्राहक (विषयी) के परस्पर अनुरूप भेद के कारण अनेक रूप वाला है।