Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 18.42 / 78

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)18.42

18.42
शमो दमस्तथाः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च । ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्राह्मं कर्म स्वभावजम् ॥ १८-४२ ॥
śamo damastathāḥ śaucaṃ kṣāntirārjavameva ca | jñānaṃ vijñānamāstikyaṃ brāhmaṃ karma svabhāvajam || 18-42 ||
— शम, दम, वैसे ही शौच ; — क्षमा और सरलता ; — ज्ञान, विज्ञान, आस्तिकता ; — ब्राह्मण का स्वभावजनित कर्म

शम, दम, तप, शौच, क्षमा, सरलता, ज्ञान, विज्ञान और आस्तिकता — ये ब्राह्मण के स्वभावजनित कर्म हैं।