Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.7 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.7

17.7
आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः । यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु ॥ १७-७ ॥
āhārastvapi sarvasya trividho bhavati priyaḥ | yajñastapastathā dānaṃ teṣāṃ bhedamimaṃ śṛṇu || 17-7 ||
— सबको प्रिय आहार भी ; — तीन प्रकार का होता है ; — यज्ञ, तप, वैसे ही दान ; — इनका यह भेद सुन

सबको प्रिय आहार भी तीन प्रकार का होता है, वैसे ही यज्ञ, तप और दान भी; इनका यह भेद सुन।