Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.2 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.2

16.2
अहिंसा सत्यमक्रोधस्त्यागऽसक्तिरपैशुनम् । दया भूतेष्वलौल्यं च मार्दवं ह्रीरचापलम् ॥ १६-२ ॥
ahiṃsā satyamakrodhastyāga'saktirapaiśunam | dayā bhūteṣvalaulyaṃ ca mārdavaṃ hrīracāpalam || 16-2 ||
— अहिंसा, सत्य, अक्रोध ; — त्याग, अनासक्ति, अपैशुन (चुगली न करना) ; — भूतों में दया, और अलोलुपता ; — मृदुता, लज्जा, अचपलता

अहिंसा, सत्य, अक्रोध, त्याग, शान्ति, अपैशुन (चुगली न करना), भूतों में दया, अलोलुपता, मृदुता, लज्जा और अचपलता;