The Great Liberation Tantra· 3.83 / 153

The Great Liberation Tantra3.83

3.83
यथाकाले यथादेशे यथायोगेन लभ्यते । ब्रह्मसात् कृतनैवेद्यमश्नीयादविचारयन् ॥८३॥
yathākāle yathādeśe yathāyogena labhyate | brahmasāt kṛtanaivedyamaśnīyādavicārayan ||83||
— जिस काल में ; — जिस देश में ; — जिस प्रकार ; — प्राप्त हो ; — ब्रह्म को समर्पित नैवेद्य को ; — खाए ; — बिना विचार किए

जिस काल में, जिस देश में, जिस प्रकार प्राप्त हो — ब्रह्म को समर्पित नैवेद्य को बिना विचार किए खाए।