The Great Liberation Tantra· 3.82 / 153

The Great Liberation Tantra3.82

3.82
नात्र वर्णविचारोऽस्ति नोच्छिष्टादिविवेचनम् । न कालनियमोऽप्यत्र शौचाशौचं तथैव च ॥८२॥
nātra varṇavicāro'sti nocchiṣṭādivivecanam | na kālaniyamo'pyatra śaucāśaucaṃ tathaiva ca ||82||
— यहाँ नहीं ; — वर्ण का विचार ; — है ; — न उच्छिष्ट आदि का विवेक ; — नहीं ; — काल का नियम ; — यहाँ भी ; — शौच-अशौच ; — इसी प्रकार ; — और

यहाँ न वर्ण का विचार है, न उच्छिष्ट आदि का विवेक; न काल का नियम है, और न शौच-अशौच का (विचार)।