The Great Liberation Tantra· 3.65 / 153

The Great Liberation Tantra3.65

3.65
प्रदोषेऽदः पठेन्नित्यं सोमवारे विशेषतः । श्रावयेद्बोधयेत् प्राज्ञो ब्रह्मनिष्ठान् स्वबान्धवान् ॥६५॥
pradoṣe'daḥ paṭhennityaṃ somavāre viśeṣataḥ | śrāvayedbodhayet prājño brahmaniṣṭhān svabāndhavān ||65||
— प्रदोष-काल में ; — इसे ; — प्रतिदिन पढ़े ; — सोमवार को ; — विशेषतः ; — सुनाए और बोध कराए ; — बुद्धिमान् ; — ब्रह्म-निष्ठों को ; — अपने बान्धवों को

इसे प्रतिदिन प्रदोष-काल में, और विशेषतः सोमवार को पढ़े; बुद्धिमान् इसे ब्रह्म-निष्ठ अपने बान्धवों को सुनाए और उनमें इसका बोध कराए।