The Great Liberation Tantra· 3.151 / 153

The Great Liberation Tantra3.151

3.151
ये च तानवमन्यन्ते ते नरा ब्रह्मघातिनः । पतन्ति घोरनरके यावद्भास्करतारकम् ॥१५१॥
ye ca tānavamanyante te narā brahmaghātinaḥ | patanti ghoranarake yāvadbhāskaratārakam ||151||
— जो ; — और ; — उनका ; — अपमान करते हैं ; — वे ; — मनुष्य ; — ब्रह्मघाती ; — गिरते हैं ; — घोर नरक में ; — जब तक सूर्य और तारे (रहें)

और जो उनका अपमान करते हैं, वे मनुष्य ब्रह्मघाती हैं; वे जब तक सूर्य और तारे (रहें), तब तक घोर नरक में गिरते हैं।