The Great Liberation Tantra· 3.150 / 153

The Great Liberation Tantra3.150

3.150
ब्राह्मणा यतयः साक्षादितरे ब्राह्मणैः समाः । तस्मात् सर्वे पूजयेयुर्ब्रह्मज्ञान् ब्रह्मदीक्षितान् ॥१५०॥
brāhmaṇā yatayaḥ sākṣāditare brāhmaṇaiḥ samāḥ | tasmāt sarve pūjayeyurbrahmajñān brahmadīkṣitān ||150||
— (ऐसे) ब्राह्मण ; — यति ; — साक्षात् ; — अन्य ; — ब्राह्मणों के ; — समान ; — इसलिए ; — सब ; — सम्मान करें ; — ब्रह्मज्ञों का ; — ब्रह्म-दीक्षितों का

(ऐसे) ब्राह्मण साक्षात् यति हैं, और अन्य (निम्न वर्ण के) भी ब्राह्मणों के समान हैं; इसलिए सभी को ब्रह्मज्ञ, ब्रह्म-दीक्षितों का सम्मान करना चाहिए।