The Great Liberation Tantra3.146
पिताऽपि दीक्षयेत् पुत्रान् भ्राता भ्रातॄन् पतिः स्त्रियम् ।
मातुलो भागिनेयांश्च नप्तॄन् मातामहोऽपि च ॥१४६॥
pitā'pi dīkṣayet putrān bhrātā bhrātṝn patiḥ striyam |
mātulo bhāgineyāṃśca naptṝn mātāmaho'pi ca ||146||
— पिता भी ; — दीक्षित करे ; — पुत्रों को ; — भाई ; — भाइयों को ; — पति ; — स्त्री को ; — मामा ; — और भानजों को ; — नातियों को ; — नाना भी ; — और पिता भी पुत्रों को दीक्षित करे, भाई भाइयों को, पति स्त्री को, मामा भानजों को, और नाना भी नातियों को।