The Great Liberation Tantra· 3.130 / 153

The Great Liberation Tantra3.130

3.130
इति प्रार्थ्य गुरुं पश्चात् पूजयित्वा स्वशक्तितः । कृताञ्चलिपुटो भूत्वा तूष्णीं तिष्ठेत् गुरोः पुरः ॥१३०॥
iti prārthya guruṃ paścāt pūjayitvā svaśaktitaḥ | kṛtāñcalipuṭo bhūtvā tūṣṇīṃ tiṣṭhet guroḥ puraḥ ||130||
— इस प्रकार ; — प्रार्थना करके ; — गुरु को ; — तत्पश्चात् ; — पूजन करके ; — अपनी शक्ति के अनुसार ; — हाथ जोड़कर ; — होकर ; — मौन ; — रहे ; — गुरु के ; — समक्ष

इस प्रकार प्रार्थना करके, और तत्पश्चात् यथाशक्ति गुरु का पूजन करके, हाथ जोड़कर साधक गुरु के समक्ष मौन खड़ा रहे।