The Great Liberation Tantra3.129
करुणामय दीनेश तवाऽहं शरणागतः ।
त्वत्पदाम्भोरुहच्छायां देहि मूर्ध्नि यशोधन ॥१२९॥
karuṇāmaya dīneśa tavā'haṃ śaraṇāgataḥ |
tvatpadāmbhoruhacchāyāṃ dehi mūrdhni yaśodhana ||129||
— हे करुणामय ; — हे दीनेश ; — मैं आपकी (शरण में) ; — शरणागत हूँ ; — आपके चरण-कमलों की छाया ; — दीजिए ; — मस्तक पर ; — हे यशोधन 'हे करुणामय, हे दीनेश, मैं आपकी शरण में आया हूँ; हे यशोधन, अपने चरण-कमलों की छाया मेरे मस्तक पर प्रदान कीजिए।'