The Great Liberation Tantra· 3.123 / 153

The Great Liberation Tantra3.123

3.123
अल्पायुषः स्वल्पवृत्ता अन्नाधीनासवः प्रिये । लुब्धा धनार्जने व्यग्राः सदा चञ्चलमानसाः ॥१२३॥
alpāyuṣaḥ svalpavṛttā annādhīnāsavaḥ priye | lubdhā dhanārjane vyagrāḥ sadā cañcalamānasāḥ ||123||
— अल्पायु ; — स्वल्प जीविका वाले ; — जिनके प्राण अन्न पर अवलम्बित ; — हे प्रिये ; — लोभी ; — धन कमाने में ; — व्यग्र ; — सदा ; — चंचल-मन

हे प्रिये, अल्पायु, स्वल्प जीविका वाले, जिनके प्राण अन्न पर अवलम्बित हैं, लोभी, धन कमाने में व्यग्र, और सदा चंचल-मन,