The Great Liberation Tantra· 2.4 / 54

The Great Liberation Tantra2.4

2.4
सर्वज्ञा त्वं त्रिकालज्ञा धर्मज्ञा परमेश्वरि । भूतं भवद्भविष्यञ्च धर्मयुक्तं त्वया प्रिये ॥४॥
sarvajñā tvaṃ trikālajñā dharmajñā parameśvari | bhūtaṃ bhavadbhaviṣyañca dharmayuktaṃ tvayā priye ||4||
— सर्वज्ञ ; — तुम ; — त्रिकालज्ञ ; — धर्मज्ञ ; — हे परमेश्वरि ; — भूत ; — वर्तमान और भविष्य ; — धर्म से युक्त ; — तुम्हारे द्वारा (ज्ञात) ; — हे प्रिये

हे परमेश्वरि, तुम सर्वज्ञ, त्रिकालज्ञ और धर्मज्ञ हो; हे प्रिये, भूत, वर्तमान और भविष्य — सब धर्म से युक्त (बातें) तुम्हें ज्ञात हैं।