The Great Liberation Tantra· 2.38 / 54

The Great Liberation Tantra2.38

2.38
तदधीनं जगत् सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् । तदालम्बनतस्तिष्ठेदवितर्क्यमिदं जगत् ॥३८॥
tadadhīnaṃ jagat sarvaṃ trailokyaṃ sacarācaram | tadālambanatastiṣṭhedavitarkyamidaṃ jagat ||38||
— उसके अधीन ; — जगत् ; — समस्त ; — त्रिलोक ; — चराचर सहित ; — उसके अवलम्बन से ; — टिका रहता है ; — अचिन्त्य ; — यह ; — जगत्

चराचर सहित समस्त त्रिलोक रूपी सम्पूर्ण जगत् उन्हीं के अधीन है; यह अचिन्त्य जगत् उन्हीं के अवलम्बन से टिका रहता है।