तदधीनं जगत् सर्वं त्रैलोक्यं सचराचरम् ।
तदालम्बनतस्तिष्ठेदवितर्क्यमिदं जगत् ॥३८॥
tadadhīnaṃ jagat sarvaṃ trailokyaṃ sacarācaram |
tadālambanatastiṣṭhedavitarkyamidaṃ jagat ||38||
चराचर सहित समस्त त्रिलोक रूपी सम्पूर्ण जगत् उन्हीं के अधीन है; यह अचिन्त्य जगत् उन्हीं के अवलम्बन से टिका रहता है।