The Great Liberation Tantra· 2.17 / 54

The Great Liberation Tantra2.17

2.17
अन्यमन्त्रैः कृतं कर्म बन्ध्यास्त्रीसङ्गमो यथा । न तत्र फलसिद्धिः स्यात् श्रम एव हि केवलम् ॥१७॥
anyamantraiḥ kṛtaṃ karma bandhyāstrīsaṅgamo yathā | na tatra phalasiddhiḥ syāt śrama eva hi kevalam ||17||
— अन्य मन्त्रों से ; — किया गया ; — कर्म ; — बन्ध्या स्त्री का संगम ; — के समान ; — नहीं ; — उसमें ; — फल की सिद्धि ; — हो ; — श्रम ; — केवल ; — निश्चय ही ; — मात्र

अन्य मन्त्रों से किया गया कर्म बन्ध्या स्त्री के संगम के समान है; उसमें फल की सिद्धि नहीं होती — केवल श्रम ही (शेष) रहता है।