The Great Liberation Tantra· 1.62 / 72

The Great Liberation Tantra1.62

1.62
ह्रदे गर्त्ते प्रान्तरे च प्रासादात् पर्वतादपि । पतिष्यन्ति मरिष्यन्ति मनुजा मदविह्वलाः ॥६२॥
hrade gartte prāntare ca prāsādāt parvatādapi | patiṣyanti mariṣyanti manujā madavihvalāḥ ||62||
— तालाब में ; — गड्ढे में ; — उजाड़ प्रदेश में ; — और ; — महल से ; — पर्वत से ; — भी ; — गिरेंगे ; — मरेंगे ; — मनुष्य ; — मद से विह्वल

मद से विह्वल मनुष्य तालाब में, गड्ढे में, उजाड़ प्रदेश में, और महल अथवा पर्वत से भी गिरकर मर जाएँगे।