The Great Liberation Tantra· 1.42 / 72

The Great Liberation Tantra1.42

1.42
परस्त्रीहरणे पापशङ्काभयविवर्जिताः । निर्धना मलिना दीना दरिद्राश्चिररोगिणः ॥४२॥
parastrīharaṇe pāpaśaṅkābhayavivarjitāḥ | nirdhanā malinā dīnā daridrāścirarogiṇaḥ ||42||
— पराई स्त्रियों के हरण में ; — पाप की शंका और भय से रहित ; — निर्धन ; — मलिन ; — दीन ; — दरिद्र ; — चिर-रोगी

पराई स्त्रियों के हरण में पाप की शंका और भय से रहित, निर्धन, मलिन, दीन, दरिद्र और चिर-रोगी होंगे।