The Great Liberation Tantra1.42
परस्त्रीहरणे पापशङ्काभयविवर्जिताः ।
निर्धना मलिना दीना दरिद्राश्चिररोगिणः ॥४२॥
parastrīharaṇe pāpaśaṅkābhayavivarjitāḥ |
nirdhanā malinā dīnā daridrāścirarogiṇaḥ ||42||
— पराई स्त्रियों के हरण में ; — पाप की शंका और भय से रहित ; — निर्धन ; — मलिन ; — दीन ; — दरिद्र ; — चिर-रोगी पराई स्त्रियों के हरण में पाप की शंका और भय से रहित, निर्धन, मलिन, दीन, दरिद्र और चिर-रोगी होंगे।