The Great Liberation Tantra· 1.43 / 72

The Great Liberation Tantra1.43

1.43
विप्राः शूद्रसमाचाराः सन्ध्यावन्दनवर्जिताः । अयाज्ययाजका लुब्धा दुर्वृत्ताः पापकारिणः ॥४३॥
viprāḥ śūdrasamācārāḥ sandhyāvandanavarjitāḥ | ayājyayājakā lubdhā durvṛttāḥ pāpakāriṇaḥ ||43||
— ब्राह्मण ; — शूद्रों के समान आचरण वाले ; — सन्ध्यावन्दन से रहित ; — अयाज्यों के याजक ; — लोभी ; — दुराचारी ; — पापकारी

ब्राह्मण शूद्रों के समान आचरण वाले, सन्ध्यावन्दन से रहित, अयाज्यों के याजक, लोभी, दुराचारी और पापकारी होंगे;