विप्राः शूद्रसमाचाराः सन्ध्यावन्दनवर्जिताः ।
अयाज्ययाजका लुब्धा दुर्वृत्ताः पापकारिणः ॥४३॥
viprāḥ śūdrasamācārāḥ sandhyāvandanavarjitāḥ |
ayājyayājakā lubdhā durvṛttāḥ pāpakāriṇaḥ ||43||
ब्राह्मण शूद्रों के समान आचरण वाले, सन्ध्यावन्दन से रहित, अयाज्यों के याजक, लोभी, दुराचारी और पापकारी होंगे;