— बैठकर (क्त्वान्त); — आसन पर सम्यक् (अधिकरण + अव्यय); — बाहुओं को बनाकर (कर्म द्विवचन + क्त्वान्त); — अर्ध-कुञ्चित (आधे मुड़े हुए) — समासगत विशेषण; — कक्ष (काँख) के व्योम (शून्य) में (अधिकरण — समासगत); — मन को रखता हुआ (कर्म + वर्तमान कृदन्त); — शान्ति को प्राप्त होता है (कर्म + वर्तमान काल); — उसके लय से (अपादान — समासगत)
आसन पर सम्यक् बैठकर, बाहुओं को अर्ध-कुञ्चित करके, कक्ष (काँख) के व्योम (शून्य) में मन को रखता हुआ (साधक) उसी के लय से शान्ति को प्राप्त होता है। (धारणा ७८)