grāhyagrāhakasaṃvittiḥ sāmānyā sarvadehinām |
yogināṃ tu viśeṣo'sti sambandhe sāvadhānatā
anuṣṭubh
— ग्राह्य-ग्राहक का संवित् (बोध) — कर्ता कारक — समासगत; — समान, साधारण (विशेषण); — सब देहियों का (षष्ठी बहुवचन); — किन्तु योगियों का विशेष है (षष्ठी + अव्यय + कर्ता + क्रिया); — (विषय-)सम्बन्ध में (अधिकरण कारक); — सावधानता (कर्ता कारक)
ग्राह्य (विषय) और ग्राहक (विषयी) का संवित् (बोध) सब देहियों में समान है; किन्तु योगियों का (इसमें) विशेष (अन्तर) है — (वे) सम्बन्ध में सावधान (जागरूक) रहते हैं। (धारणा ७१)