— हे गुह्य से भी अति-गुह्य के गोप्ता! (सम्बोधन — समासगत); — तुम (कर्ता कारक); — यद्यपि (अव्यय-युग्म); — यह (कर्ता/कर्म कारक नपुंसक); — हे वरानने! (सुन्दरमुखी, सम्बोधन); — तथापि, फिर भी (अव्यय-युग्म); — मैं कहूँगा (भविष्यत् काल, उत्तम पुरुष एकवचन); — जैसा, जिस प्रकार (सम्बन्धवाचक अव्यय); — तुम जानती हो (वर्तमान, मध्यम पुरुष एकवचन — √विद्); — वैसा सुनो (आज्ञार्थ, मध्यम पुरुष एकवचन)
हे वरानने (सुन्दरमुखी)! यद्यपि यह (तत्त्व) अति-गुह्य के भी गोप्ता (परम रहस्य का संरक्षक) है, फिर भी मैं उसे कहूँगा — तुम जैसा जानने योग्य हो वैसा सुनो।