Vijñāna Bhairava Tantra · 1.78

Vijñāna Bhairava Tantra 1.78

1.78
माया विमोहिनी नाम कलायाः कलनं स्थितम् । इत्यादिधर्मं तत्त्वानां कलयन्न पृथग्भवेत् ॥७८॥
māyā vimohinī nāma kalāyāḥ kalanaṃ sthitam | ityādidharmaṃ tattvānāṃ kalayan na pṛthag bhavet
anuṣṭubh
— विमोहिनी नामक माया (कर्ता कारक) ; — कला की (षष्ठी एकवचन) ; — कलन, परिमित-कार्य (कर्ता कारक) ; — स्थित है (कर्मवाच्य भूत कृदन्त) ; — इत्यादि धर्म, ऐसे-ऐसे गुण (कर्म कारक — समासगत) ; — तत्त्वों के (षष्ठी बहुवचन) ; — कलित (अनुसन्धान) करता हुआ (वर्तमान कृदन्त) ; — पृथक् न हो (विधि लिङ् निषेध)

'विमोहिनी' नामक माया है, कला का कलन (परिमित-कार्य) स्थित है — इत्यादि (आगमोक्त) तत्त्वों के धर्मों को कलित (अनुसन्धान) करता हुआ (साधक उनसे) पृथक् न हो (एक चित्-तत्त्व में स्थित रहे)। (धारणा ६०)