— चित्त आदि अन्तःकरण (कर्ता कारक — समासगत); — नहीं है (निषेधार्थ + वर्तमान); — मेरे भीतर (षष्ठी + अव्यय); — इस प्रकार भावना करे (विधि लिङ् + अव्यय); — विकल्पों के अभाव से (अपादान — समासगत); — विकल्पों से रहित हो जाए — करण + विशेषण + क्रिया
'मेरे भीतर चित्त आदि अन्तःकरण है ही नहीं' — इस प्रकार भावना करे; विकल्पों के अभाव से वह विकल्पों से रहित (मुक्त) हो जाता है। (धारणा ५९)