— इसी प्रकार ही (अव्यय-युग्म); — घोर रात्रि में, दुर्निशा में (अधिकरण कारक); — कृष्ण-पक्ष के आगमन पर (अधिकरण — समासगत); — चिर काल तक (अव्यय); — तैमिर (अन्धकार) को (कर्म कारक); — भावना करता हुआ (वर्तमान कृदन्त); — भैरव-रूप के रूप में (कर्म कारक); — (उस) रूप को प्राप्त होता है (कर्म + भविष्यत् काल)
इसी प्रकार दुर्निशा (घोर रात्रि) में, कृष्ण-पक्ष के आगमन पर, चिर काल तक तैमिर (अन्धकार) की भैरव-रूप (के रूप में) भावना करता हुआ (साधक) उस (भैरव) रूप को प्राप्त होता है। (धारणा ५२)