— अल्प-ज्ञात (कर्ता कारक नपुंसक); — द्वैत-कारक (समासगत विशेषण); — बाह्य आलोक, बाहरी प्रकाश (कर्ता कारक — समासगत); — और तमस् (अन्धकार) भी (कर्ता कारक + अव्यय); — विश्व आदि (कर्म कारक — समासगत); — भैरव-स्वरूप के रूप में (कर्म कारक); — जानकर (क्त्वान्त); — अनन्त-प्रकाश-धारी हो जाता है (समासगत विशेषण)
अल्प-ज्ञात (वस्तु) द्वैत-कारक है; बाह्य आलोक (प्रकाश) और अन्धकार भी (द्वैत-कारक हैं); विश्व आदि को भैरव-रूप जानकर (साधक) अनन्त-प्रकाश-धारी हो जाता है। (धारणा ५१)