— किसी वस्तु पर (अधिकरण कारक); — रखकर (क्त्वान्त); — धीरे-धीरे (अव्यय); — दृष्टि को (कर्म कारक); — वापस खींच ले, निवृत्त करे (विधि लिङ् — णिजन्त); — वह ज्ञान (कर्ता कारक); — चित्त-सहित, मन के साथ (विशेषण — समासगत); — हे देवि! (सम्बोधन); — शून्य का आलय (निवास) हो जाए — कर्ता + विधि लिङ्
हे देवि! किसी वस्तु पर (दृष्टि) रखकर धीरे-धीरे दृष्टि को निवृत्त कर ले (खींच ले); तब वह ज्ञान चित्त-सहित (शान्त होकर साधक) शून्य का आलय (निवास) हो जाता है। (धारणा ३३)