praṇavādisamuccārāt plutānte śūnyabhāvanāt |
śūnyayā parayā śaktyā śūnyatām eti bhairavi
anuṣṭubh
— प्रणव (ॐ) आदि के उच्चारण से (अपादान — समासगत); — प्लुत (दीर्घतर) अन्त में (अधिकरण — समासगत); — शून्य की भावना से (अपादान — समासगत); — शून्या, परा शक्ति के द्वारा (करण कारक स्त्रीलिङ्ग); — शून्यता को प्राप्त होता है (कर्म कारक + क्रिया); — हे भैरवि! (सम्बोधन)
हे भैरवि! ॐ (प्रणव) आदि का उच्चारण करते हुए, प्लुत (दीर्घतर) अन्त में शून्य की भावना से — शून्या परा शक्ति के द्वारा साधक शून्यता को प्राप्त होता है। (धारणा १६)