— अनाहत (अनस्त्रक नाद) में (अधिकरण कारक); — पात्र-सदृश कान में (अधिकरण कारक — समासगत); — अभग्न (अखण्ड) शब्द में (अधिकरण — समासगत); — नदी-प्रवाह के समान बहते हुए (समासगत विशेषण); — शब्द-ब्रह्म में (अधिकरण — समासगत); — निष्णात, मग्न (कर्ता कारक); — परम ब्रह्म को (कर्म कारक); — प्राप्त करता है (वर्तमान काल)
अनाहत (अनस्त्रक नाद) में, पात्र-सदृश कान में, अभग्न (अखण्ड) शब्द में, नदी-प्रवाह के समान बहते हुए शब्द-ब्रह्म में जो निष्णात (मग्न) हो जाता है — वह परब्रह्म को प्राप्त करता है। (धारणा १५)