— अन्तर-धाम (हृदय-स्थान) के क्षोभ से उत्पन्न (समासगत विशेषण); — सूक्ष्म अग्नि-तिलक के आकार वाले (समासगत विशेषण); — बिन्दु को (कर्म कारक); — शिखा के अन्त में (अधिकरण — समासगत); — हृदय में (अधिकरण कारक); — लय के अन्त में (अधिकरण — समासगत); — ध्यान करने वाले को (षष्ठी/सम्प्रदान); — लय, विलय (कर्ता कारक)
अन्तर-धाम (हृदय-स्थान) के क्षोभ से उत्पन्न सूक्ष्म अग्नि-तिलक के आकार वाले बिन्दु को शिखा के अन्त में, हृदय में ध्यान करने वाले को लय के अन्त में लय (परम विलय) प्राप्त होता है। (धारणा १४)