Vijñāna Bhairava Tantra · 1.163

Vijñāna Bhairava Tantra 1.163

1.163
इति विज्ञानभैरवे श्रीदेव्या स्तवनात्मकम् । शतैकं द्वादशाधिकमुक्तं भेदविवर्जितम् ॥१६३॥
iti vijñānabhairave śrīdevyā stavanātmakam | śataikaṃ dvādaśādhikam uktaṃ bhedavivarjitam
anuṣṭubh
— इस प्रकार विज्ञान-भैरव में (अव्यय + अधिकरण) ; — श्रीदेवी की स्तवन-स्वरूप (षष्ठी + समासगत विशेषण) ; — एक सौ (कर्म कारक — समासगत) ; — बारह से अधिक — कुल १११२ (कर्म — समासगत) ; — कहे गए हैं (कर्मवाच्य भूत कृदन्त) ; — भेद से रहित, अद्वैत-स्वरूप (समासगत विशेषण)

इस प्रकार विज्ञान-भैरव में श्रीदेवी की स्तवन-रूप (जो ये उपदेश हैं), वे एक सौ बारह (११२) — भेद से रहित (अद्वैत-स्वरूप) — कहे गए हैं।