The Essence of the Tantra· 8.72 / 93

The Essence of the Tantra8.72

8.72

प्रकृतिस्कन्धस् तु तस्यैव त्रिविधः सत्त्वादिभेदात्

Transliteration (IAST)

prakṛtiskandhas tu tasyaiva trividhaḥ sattvādibhedāt

— प्रकृति-स्कन्ध — भूत-उत्पादक शाखा ; — तीन प्रकार का ; — सत्त्व आदि के भेद से

किन्तु उसी (अहङ्कार) का प्रकृति-स्कन्ध सत्त्व आदि के भेद से तीन प्रकार का है।