The Essence of the Tantra· 5.30 / 43

The Essence of the Tantra5.30

5.30

पूर्वं स्वबोधे तदनु प्रमेये विश्रम्य मेयं परिपूरयेत

Transliteration (IAST)

pūrvaṃ svabodhe tadanu prameye viśramya meyaṃ paripūrayeta

— अपने बोध में ; — प्रमेय में विश्राम कर के ; — मेय (ज्ञेय) को (चैतन्य से) परिपूर्ण करे

पहले अपने बोध में, तदनन्तर प्रमेय में विश्राम कर के मेय (ज्ञेय) को (चैतन्य से) परिपूर्ण करे;