The Essence of the Tantra· 5.28 / 43

The Essence of the Tantra5.28

5.28

तत्र मुख्या स्पन्दनरूपता सङ्कोचविकासात्मतया यामलरूपतोदयेन विसर्गकलाविश्रान्तिलाभात् इत्य् अलम्

Transliteration (IAST)

tatra mukhyā spandanarūpatā saṅkocavikāsātmatayā yāmalarūpatodayena visargakalāviśrāntilābhāt ity alam

— मुख्य स्पन्दन-रूपता ; — संकोच-विकास-आत्मकता से ; — यामल (युगल) रूपता के उदय से ; — विसर्ग-कला में विश्रान्ति की प्राप्ति से ; — इतना पर्याप्त है

उसमें संकोच-विकास-आत्मकता से, यामल-रूपता के उदय द्वारा, विसर्ग-कला में विश्रान्ति की प्राप्ति से मुख्य स्पन्दन-रूपता (होती है) — इतना पर्याप्त है।