The Essence of the Tantra· 3.7 / 34

The Essence of the Tantra3.7

3.7

ननु अत्र बिम्बं किं स्यात् माभूत् किञ्चित्

Transliteration (IAST)

nanu atra bimbaṃ kiṃ syāt mābhūt kiñcit

— ननु — किन्तु (आक्षेपक अव्यय) ; — बिम्ब — मूल वस्तु (जिसका प्रतिबिम्ब हो) ; — क्या होगा? ; — कोई भी न हो (उत्तर) ; — कोई भी (मूल वस्तु)

(शंका) किन्तु यहाँ बिम्ब (मूल वस्तु) क्या होगा? (उत्तर) कोई भी न हो।