The Essence of the Tantra· 22.2 / 53

The Essence of the Tantra22.2

22.2

अब्रह्मचारिणस् तस्य त्यागाद् आनन्दवर्जिताः

Transliteration (IAST)

abrahmacāriṇas tasya tyāgād ānandavarjitāḥ

— जो अब्रह्मचारी (ब्रह्म में अविचरण करने वाले) ; — उसके (आनन्द के) त्याग के कारण ; — आनन्द से रहित

जो अब्रह्मचारी (ब्रह्म में अविचरण करने वाले) हैं, वे उसके (आनन्द के) त्याग के कारण आनन्द से रहित (होते हैं)।