The Essence of the Tantra· 22.12 / 53

The Essence of the Tantra22.12

22.12

तद् उक्तम् सृष्टिं तु सम्पुटीकृत्य इति

Transliteration (IAST)

tad uktam sṛṣṭiṃ tu sampuṭīkṛtya iti

— वही कहा गया है ; — 'सृष्टि (विश्व) को सम्पुटित करके'

वही कहा गया है — 'सृष्टि को सम्पुटित करके' — इस प्रकार।