तत्र विभवेन देवं पूजयित्वा आहुत्या तर्पयित्वा पवित्रकं दद्यात् सौवर्णमुक्तारत्नविरचितात् प्रभृति पटसूत्रकार्पासकुशगर्भान्तम् अपि कुर्यात्
Transliteration (IAST)
tatra vibhavena devaṃ pūjayitvā āhutyā tarpayitvā pavitrakaṃ dadyāt sauvarṇamuktāratnaviracitāt prabhṛti paṭasūtrakārpāsakuśagarbhāntam api kuryāt
उस अवसर पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार देव की पूजा करके, आहुति से (उन्हें) तृप्त करके पवित्रक अर्पित करे; सोने, मोती एवं रत्नों से रचित (पवित्रक) से लेकर पट-सूत्र, कार्पास एवं कुश के गर्भ वाले (पवित्रक) तक — (ऐसा भी पवित्रक) बना सकता है।