The Essence of the Tantra· 20.37 / 65

The Essence of the Tantra20.37

20.37

ततो ऽन्ते दक्षिणाताम्बूलवस्त्रादिभिः तर्पयेत् इति प्रधानतमो ऽयं मूर्तियागः

Transliteration (IAST)

tato 'nte dakṣiṇātāmbūlavastrādibhiḥ tarpayet iti pradhānatamo 'yaṃ mūrtiyāgaḥ

— फिर अन्त में ; — दक्षिणा, ताम्बूल, वस्त्र आदि से ; — तर्पित करे ; — सबसे प्रधानतम (सर्वश्रेष्ठ) ; — यह मूर्ति-याग

फिर अन्त में दक्षिणा, ताम्बूल, वस्त्र आदि से तर्पित करे — यह सबसे प्रधानतम मूर्ति-याग है।