The Essence of the Tantra· 20.30 / 65

The Essence of the Tantra20.30

20.30

यदि मार्गशीर्षादिक्रमेण यथासङ्ख्यं भवति आश्वयुजं वर्जयित्वा तदा विशेषविशेषः

Transliteration (IAST)

yadi mārgaśīrṣādikrameṇa yathāsaṅkhyaṃ bhavati āśvayujaṃ varjayitvā tadā viśeṣaviśeṣaḥ

— मार्गशीर्ष आदि के क्रम से ; — यथासंख्य (मिलते क्रम में) ; — (योग) होता है ; — आश्वयुज (मास) को छोड़कर ; — विशेष-विशेष

यदि मार्गशीर्ष आदि के क्रम से यथासंख्य (मिलते क्रम में) होता है — आश्वयुज को छोड़कर — तब विशेष-विशेष है।