The Essence of the Tantra· 20.29 / 65

The Essence of the Tantra20.29

20.29

चित्राचन्द्रौ मघाजीवौ तिष्यचन्द्रौ पूर्वफाल्गुनीबुधौ श्रवणबुधौ शतभिषक्चन्द्रौ दित्यौ रोहिणीशुक्रौ विशाखाबृहस्पती श्रवणचन्द्रौ इति

Transliteration (IAST)

citrācandrau maghājīvau tiṣyacandrau pūrvaphālgunībudhau śravaṇabudhau śatabhiṣakcandrau dityau rohiṇīśukrau viśākhābṛhaspatī śravaṇacandrau iti

— चित्रा (नक्षत्र) एवं चन्द्र ; — मघा एवं जीव (बृहस्पति) ; — तिष्य (पुष्य) एवं चन्द्र ; — पूर्वफाल्गुनी एवं बुध ; — श्रवण एवं बुध ; — शतभिषक् एवं चन्द्र ; — दिति (अदिति-नक्षत्र, पुनर्वसु; अपने स्वामी सहित) ; — रोहिणी एवं शुक्र ; — विशाखा एवं बृहस्पति ; — श्रवण एवं चन्द्र

(मास-मास के उचित योग ये हैं:) चित्रा-चन्द्र, मघा-जीव (बृहस्पति), तिष्य (पुष्य)-चन्द्र, पूर्वफाल्गुनी-बुध, श्रवण-बुध, शतभिषक्-चन्द्र, दिति (पुनर्वसु अपने स्वामी सहित), रोहिणी-शुक्र, विशाखा-बृहस्पति, श्रवण-चन्द्र।