The Essence of the Tantra· 16.13 / 24

The Essence of the Tantra16.13

16.13

परमेश्वर एव हि गुरुशरीराधिष्ठानद्वारेण अनुग्राह्यान् अनुगृह्णाति

Transliteration (IAST)

parameśvara eva hi guruśarīrādhiṣṭhānadvāreṇa anugrāhyān anugṛhṇāti

— परमेश्वर ही ; — गुरु-शरीर के अधिष्ठान के द्वारा (माध्यम से) ; — अनुग्राह्य जनों पर ; — अनुग्रह करता है

क्योंकि परमेश्वर ही गुरु-शरीर के अधिष्ठान के द्वारा अनुग्राह्य जनों पर अनुग्रह करता है।